Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Sudhir Kumar Pal

Others

2  

Sudhir Kumar Pal

Others

अपनों के ग़म ने इतना मारा...

अपनों के ग़म ने इतना मारा...

1 min
179


अपनों के ग़म ने, इतना मारा इस दिल को,

के ग़ैरों के ज़ख्मों की, जग़ह तक ना बची...


दर्द के ताबूत, हसरत-ए-इश्क़, कभी देता था ज़माना,

आज दिल-ए-आँगन में, इक लिफ़ाफ़े की जग़ह तक ना बची...


कभी माहताब पर लहराते थे, जो इश्क़-ए–परचम,

आज टूटे तारे के दीदार की भी, उम्मीद तक ना बची...


रस्म-ए-वफ़ा ता उम्र, निभाना जो जानते थे वो,

नाम संगेमरमर पे, उकेरना जो जानते थे वो,

हशर हुआ ऐसा, वो बदहाली यूँ छायी,

कि लिखने को दास्तां-ए-मोहब्बत, उनके रेत तक ना बची...


Rate this content
Log in