Zahiruddin Sahil
Drama
मैं भारत हूँ !
अपनी अदा से पहचाना जाता हूँ !
न कि मंदिर-मन्दिर, गिरजे-गुरुद्वारे
से जाना जाता हूँ
मैं अपनी तहज़ीब की आवाज़
जी हाँ !..मैं भारत हूँ !
अपने नेग-रिवाज़
अपने लोक -व्यवहार से
जाना जाता हूँ !
सुबह
रंग ए वतन
भेज भइया को ब...
आशियाना
अमल
इशारों क...
बुलावा
पैगाम
आँगन
होने से
जैसे हो साथ तेरा, तेरा मन जीवन मेरा। जैसे हो साथ तेरा, तेरा मन जीवन मेरा।
मंजिल का तो पता नहीं पर रास्ता जरुर चल जायेंगे मंजिल का तो पता नहीं पर रास्ता जरुर चल जायेंगे
सबको जो मुझसे नजरें चुराते हैं, मैं भी दरकिनार करती हूँ। सबको जो मुझसे नजरें चुराते हैं, मैं भी दरकिनार करती हूँ।
चेहरा इंसानियत का वो नहीं घबराते हैं देखकर चेहरा इंसानियत का वो नहीं घबराते हैं देखकर
सर पर कफन बाँधता है हर भक्त खूब लहराती तिरंगे की छटा है। सर पर कफन बाँधता है हर भक्त खूब लहराती तिरंगे की छटा है।
सपने आँखों में सँजो कर, नीले गगन में उड़ने चली है, नीले गगन में उड़ने चली है। सपने आँखों में सँजो कर, नीले गगन में उड़ने चली है, नीले गगन में उड़ने चली ...
हमें रुकना होगा और रोकने होंगे यह बड़ते गलत कदम। हमें रुकना होगा और रोकने होंगे यह बड़ते गलत कदम।
बहन की जो लाज बचाए भाई है पर पुरूष कहाँ है। बहन की जो लाज बचाए भाई है पर पुरूष कहाँ है।
मगर बिन तेल ही दिया जला आती हूं, दिया जला आती हूं। मगर बिन तेल ही दिया जला आती हूं, दिया जला आती हूं।
१,२,३ बजे की, शुरूवात है समय, अनमोल है समय। १,२,३ बजे की, शुरूवात है समय, अनमोल है समय।
है जब तक सांस, पापों से लड़ने का प्रण मैं करता हूंँ। है जब तक सांस, पापों से लड़ने का प्रण मैं करता हूंँ।
जागृत है अब कोई भी नहीं सोते है नहीं चलेगा नहीं चलेगा ये महानाटक। जागृत है अब कोई भी नहीं सोते है नहीं चलेगा नहीं चलेगा ये महानाटक।
ये अंधेरा भी मिट जाएगा दिलों में जो गरज रहा ये अंधेरा। ये अंधेरा भी मिट जाएगा दिलों में जो गरज रहा ये अंधेरा।
सबकी तरक्की हो जहाँ वो मेरा प्यारा भारतदेश। सबकी तरक्की हो जहाँ वो मेरा प्यारा भारतदेश।
वरना मेरी भी जल्दी उम्र हो जाएगी अभी बच्चा हूं मुझे भी थोड़ा चलने दो। वरना मेरी भी जल्दी उम्र हो जाएगी अभी बच्चा हूं मुझे भी थोड़ा चलने दो।
पचास के उम्र की खूबसूरती पचास के उम्र की खूबसूरती
बालक ही तो है, अपनी ज़िद पर उतर आया है। बालक ही तो है, अपनी ज़िद पर उतर आया है।
मन को जो भी जीत ले, वही जीव है धन्य मोह जाल में घूमते, बाकी सारे अन्य। मन को जो भी जीत ले, वही जीव है धन्य मोह जाल में घूमते, बाकी सारे अन्य।
कागजी कार्यवाही सब हो गई बेकार मिसिंग फिफटी फोर केस सटिल बरकरार। कागजी कार्यवाही सब हो गई बेकार मिसिंग फिफटी फोर केस सटिल बरकरार।
फिर शोर कैसा ? कुछ कहानी बन गई है कुछ कहानी बाकी है। फिर शोर कैसा ? कुछ कहानी बन गई है कुछ कहानी बाकी है।