STORYMIRROR

Manu Sweta

Romance

4  

Manu Sweta

Romance

इश्क़

इश्क़

1 min
249

कुछ खामोशियाँ रहने दे दरमियाँ अपने,

कुछ ख्वाब अधूरे रहने दे अपने।

कोई तो बहाना याद करने का दे मुझको,

कुछ इल्ज़ाम अपने सर पर लेने दे मुझको।


बेमुरव्वत सा है ये इश्क जाने क्यों,

जाने कितनों का रकीब बनाएगा मुझको।

तेरे शहर में सब कुछ उलझा उलझा सा है,

कुछ तन्हाइयों को सुलझाने दे मुझको।


यूँ ही याद नहीं करता है दिल तुझको,

कभी भूलने का भी मौका दे मुझको।

अश्क़ आंखों में मेरे भी कम नही,

कभी बहाने का मौका दे मुझको।


ज़ुस्तज़ु तेरी रहेगी आखिरी दम तक,

अपने ज़ानों पर एक बार मरने दे मुझको।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance