Manjul Manzar Lucknowi
Romance
ज़ख्म दे जो वो मरहम लगाता नहीं।
रूठ जाए जो खुद वो मनाता नहीं।
इश्क़ है ये कोई खेल थोड़ी न है,
उसको होता तो तुझ को रुलाता नहीं।
जब भी दीपावली...
इंसान
जिसने पाया वो...
Ghazal..रंग म...
राज़ सारा उगल ...
राष्ट्र कवि र...
तब मेरा लहू उ...
भेड़िया धसान ह...
सामाजिक संवेद...
आग उगलने लगती...
अगर खाई है कसम साथ जीने-मरने की निभानी ही पड़ेगी नहीं तो होगी बेवफाई। अगर खाई है कसम साथ जीने-मरने की निभानी ही पड़ेगी नहीं तो होगी बेवफाई।
जो प्रेम को देखने की चाह थी तेरी आंखों में। जो प्रेम को देखने की चाह थी तेरी आंखों में।
अगर खाई है कसम साथ जीने मरने की निभाना ही पड़ेगा नहीं तो होगी रुसवाई। अगर खाई है कसम साथ जीने मरने की निभाना ही पड़ेगा नहीं तो होगी रुसवाई।
सुनो, आज भी फुरकत की शाम में आँखें तेरे दीदार को तरसता है। सुनो, आज भी फुरकत की शाम में आँखें तेरे दीदार को तरसता है।
मैं चाहती हूं तुझे इस कदर प्यार दूं कि, तू हर जन्म में मुझे ही पाना चाहें। मैं चाहती हूं तुझे इस कदर प्यार दूं कि, तू हर जन्म में मुझे ही पाना चाहें।
कभी देखा है, उजले धूप से ख़्वाब को? कभी देखा है, उजले धूप से ख़्वाब को?
मनुहार प्रियतम आस ले कजरारे कातिल हैं नयन निज रूप छवि को बिलोकती मदमस्त यौवन सा उपवन मनुहार प्रियतम आस ले कजरारे कातिल हैं नयन निज रूप छवि को बिलोकती मदमस्त...
परवानों की परिस्थिति तमन्ना है इबादत आशिकी इश्क में जल जाना। परवानों की परिस्थिति तमन्ना है इबादत आशिकी इश्क में जल जाना।
इश्क में दर्शन है राधाकृष्ण की अपमान ना करना। इश्क में दर्शन है राधाकृष्ण की अपमान ना करना।
मेरे ख़्वाबगाह की जम़ीन महक रही थी एक पहचानी खुशबू से, मेरे ख़्वाबगाह की जम़ीन महक रही थी एक पहचानी खुशबू से,
मेरी निगाहों से हुआ जो घायल बुलाए, फुर्सत भरे फिर मुझे पल बुलाएं। मेरी निगाहों से हुआ जो घायल बुलाए, फुर्सत भरे फिर मुझे पल बुलाएं।
तुम्हारे लाख प्यार जताने पर भी अगर वो सिर्फ चुप सी रहती हो तुम्हारे लाख प्यार जताने पर भी अगर वो सिर्फ चुप सी रहती हो
तू ही बता लिख दूँ क्या, ऐ ज़िंदगी। फिर से मोहब्बत, तेरी दुआओं में। तू ही बता लिख दूँ क्या, ऐ ज़िंदगी। फिर से मोहब्बत, तेरी दुआओं में।
मोहब्बत भी, काम से अपने सब भूल के इश्क़ में डूब जाऊँ, ऐसे मेरे हालात नहीं मोहब्बत भी, काम से अपने सब भूल के इश्क़ में डूब जाऊँ, ऐसे मेरे हालात नहीं
मेरा तो बस है इतना कहना तभी मेरा टूटना वाजिब होगा। मेरा तो बस है इतना कहना तभी मेरा टूटना वाजिब होगा।
अब क्या बताए उसका पता जो मेरी रग-रग में समा गए । अब क्या बताए उसका पता जो मेरी रग-रग में समा गए ।
अदा ये हुस्न की होती है, इश्क़ की पहली तालीम पढ़ा गयी। अदा ये हुस्न की होती है, इश्क़ की पहली तालीम पढ़ा गयी।
लौट जाए वहाँ, जहाँ खुद को छोड़ आये हैं, वहाँ जहाँ से ज़िन्दगी को मोड़ लाये हैं। लौट जाए वहाँ, जहाँ खुद को छोड़ आये हैं, वहाँ जहाँ से ज़िन्दगी को मोड़ लाये हैं।
जिधर भी जाती नजर हमारी, तुम ही को देखता हूं मैं। जिधर भी जाती नजर हमारी, तुम ही को देखता हूं मैं।
लौट जाए वहाँ जहाँ खुद को छोड़ आये हैं, वहाँ जहाँ से ज़िन्दगी को मोड़ लाये हैं। लौट जाए वहाँ जहाँ खुद को छोड़ आये हैं, वहाँ जहाँ से ज़िन्दगी को मोड़ लाये हैं।