इश्क पढ़ लेना
इश्क पढ़ लेना
है इश्क़ मुझे मगर
जताना नहीं आता
तुम पढ़ लो ना मेरी आँखों में
मुझे बताना नहीं आता
हैं कितने बेचैन
दूर तुझसे होकर हम
ये कह तो दें हम मगर
हमें दिल किसी का दुखाना नहीं आता
तुम पढ़ लो ना मेरी आँखों में
मुझे बताना नहीं आता
इश्क़ मोहब्बत प्यार जो भी है
बस तुमसे ही करतें हैं हम
हमें तो तेरे दिल के सिवा
कहीं और कोई ठिकाना भी नहीं आता
है ख़्वाहिश मेरी की
तुम्हें बस ऐसे ही देखतें रहें हम
मगर मुझे कोई बहाना नहीं आता
तुम पढ़ लो ना मेरी आँखों में
मुझे बताना नहीं आता।

