STORYMIRROR

Bindiyarani Thakur

Romance

3  

Bindiyarani Thakur

Romance

इश्क और समाज

इश्क और समाज

1 min
479

प्रेमियों को तो प्रेम धुन लगी है

और समाज को नियमों की पड़ी है

सारी दुनिया की बातें भूल वो

इश्क में मशगूल है,

एक दूजे की आँखों में आँखें डालकर

इश्क फरमाते हैं,

कायदे कानून की चिंता में

वे कहाँ पड़ते हैं,

शुरू से ही समाज इश्क के खिलाफ है,

अपने ही कुछ नियमों से बंधा है

इश्क और समाज में छत्तीस का आंकड़ा है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance