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Praveen Gola

Romance

3.5  

Praveen Gola

Romance

इश्क ऐसी एक आग है

इश्क ऐसी एक आग है

1 min
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तू अपने हुस्न के दीदार की ,

फरमाईश कुबूल कर ना ,

मैं तमाम उम्र तुझको ,

अपनी नजरों में कैद कर लूँ |


तेरा हुस्न मुझे दीवाना ,

बना कर के ले इजाजत ,

कि मैं अब चली जाऊँ ,

या तुम गश खा - खाके गिरोगे ?


मैं तेरे सामने खुद को ,

ना संभाल पाया ,

तेरे काँच के बदन को देख ,

यहाँ भी सब बह गया |


जो तू अगर मिलने चली आती ,

ओ मेरी जान ,

तो लौट कर जाने ना देता ,

जब तक ये ज़िस्म हरकत करता |


कुछ रिश्तों में ज़रूरी नहीं ,

कि तन से तन का मिलन ही बहके ,

इश्क ऐसी एक आग है ,

जिसकी खुशबू से ये जीवन महके |



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