इस बार
इस बार
तुमने हर बार अराजकता का
असामाजिक तत्वों का
भय बताकर
हम से हथियार छीन लिए
और तुम विजेता अशोक की तरह
महज अहिंसा के शिलालेख देते रहे
हमें मंजूर था क्योंकि हम जानते थे
हमारे पास सिर्फ यही रास्ता है
इसलिए हमने बार-बार लगातार
एक युग तक एक छत्र शासन सौंपा
लेकिन, हर बार तुमने यही कहा
सिर्फ एक बार यह जुमला हमें
भूखे नंगे बचपन से
कंगाली जवानी तक ले आया
फिर भी हमारा जादूगरी आशा का पेड़
नहीं सूखा
वह अब भी घण्टे भर में आम दे देता है
लेकिन इस बार
हमारी चेतना
हमारी कुण्डलिनी
जागृत हो चुकी हैं
इस बार हमें मंजूर है
तुम्हारे बन्दी गृह
तुमने अपने एजेंटों को
पंचायतों, विद्यालयों, मजदूर संघों
यहाँ तक कि हमारे घरों में छोड़ रखे हैं
जो तुम्हारे इशारे पर
बलवा, दंगा, आगजनी या हिंसक अराजकता या
चुनावी राजनीति में
तुम्हारी जीत सुनिश्चित करने के लिए
कटिबद्ध है प्रतिबद्ध है
और तुम कहते रहे हो इनकी ओर इंगित कर
कि ये ही वे शक्तियां हैं
जो लोकतंत्र की जड़ों को कुतर रही है
या प्रतिक्रियावाद एवं दक्षिणपंथ का
गढ़ कर रही है मजबूत
तुम डबल रोल करते रहे
पर इस बार हमने पकड़ लिया है
असली चेहरा
तुम अपने ही मंच से बोलते रहे
विरोधियों की भाषा में
और हम निश्चित नहीं कर पाए कि
इन दम घोंटू विवशताओं को
तोड़ने के लिए कौन लड रहा है
अक्सर तुम ही उस अँधेरे से जूझते नजर आए
क्योंकि हमने तुम्हारी ही दिव्य दृष्टि से देखा था
लेकिन इस बार
हर बार की तरह नहीं
दृष्टि हमारी है, महज हमारी।
