STORYMIRROR

Mayank Kumar

Classics

2  

Mayank Kumar

Classics

इंतज़ार

इंतज़ार

1 min
361

मोहब्बत है तो देख ले उन नजरों से भी,

मैं कब से खड़ा हूं उसी बरसात में !


जब तुम गई थी वादों के गुलदस्ते के साथ,

तब से वादों को ही यकीन समझ।


भीग रहा हूं उसी बरसात में।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics