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Kavi kapil khandelwal 'Kalash'

Abstract

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Kavi kapil khandelwal 'Kalash'

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इन्तजार

इन्तजार

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एक सैनिक की माँ/पत्नी को खत का इन्तजार

एक प्रेमी को अपनी प्रेमिका से मधुर मिलन का इन्तजार


किसान को बारिश का इन्तजार

बहन को भाई का राखी पर इन्तजार


रोगी को स्वस्थ होने का इन्तजार

भक्त को भगवान से मिलने का इन्तजार


गरीब को अमीर बनने का इन्तजार

बच्चे को बडा होने का इन्तजार


ईमानदार को न्याय का इन्तजार

पिंजरे के पंछी को उडने का इन्तजार


साक्षात्कार देने वाले को नौकरी का इन्तजार

कैदी को मुक्त होने का इन्तजार


व्यापारी को ग्राहक का इन्तजार

आत्मा को शरीर से मुक्त होने का इन्तजार


इस दुनिया मे हर किसी को किसी न किसी का बस इन्तजार - इन्तजार


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