STORYMIRROR

Harshit Agrawal

Drama

1  

Harshit Agrawal

Drama

इंसानियत का बाजार

इंसानियत का बाजार

1 min
443


जिंदगी के बाज़ार में,

शोहरत की दुकानें,

जोरों पर है।


सुना है सौदागर,

इंसानियत बेच,

हैसियत खरीद रहे हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama