STORYMIRROR

ritesh deo

Abstract

4  

ritesh deo

Abstract

इंसान और नियत

इंसान और नियत

2 mins
314

ईश्वर ने हमें मानव शरीर दिया उस शरीर में छोटा सा दिल दिया

जिसमें भावनाएँ भरी प्रेम भरा है रिश्ते नातों को निभाने समझने की क्षमता भी दी...

जिसने लोग अपने हिसाब से अपने व्यवहार से एहसास के माध्यम से वास करते हैं....

   

लेकिन इस दिल की भी कमजोरी होती है

कोई प्यार से बात करें तुरंत उसी का हो जाता है...

अब समाने वाला कैसा है ये तो हमें नहीं पता होता की

कब क्या करेगा हमने तो अपने दिल एक अच्छी सी छवि बनाई है

अपने दिल में उसी छवि की तरह विश्वास करते हैं...


अब सामने वाले को पता होता है किस बात से

हमारे दिल को चोट पहुंचेगी वो इंसान वही करेगा जिससे हृदय दुःख जाए...

अब तन की पीड़ा तो नहीं लेकिन मानसिक पीड़ा बहुत देता है वो इंसान

इसी लिए इतना हक न देना चाहिए कोई भी हमारा दिल दुखा सके..

जल्द ही समझ आ जाता है की वो इंसान कैसा है उसे छोड़ देना चाहिए

या फिर कोई बात हो दिल पर लो ही मत तभी खुश रह सकते हो...


हम जानते हैं की वो इंसान बहुत ख़ास है

पर इतना भी नहीं की वो चोट देता जाए और हम सहते जाए ...

हमारा जीवन है इतना तो हक किसी भी रिश्ते को नहीं है की

दर्द दे और हम रिश्ते को निभाते जाए उस रिश्ते को ही स्वतंत्र कर देना चाहिए..


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract