इंसान और नियत
इंसान और नियत
ईश्वर ने हमें मानव शरीर दिया उस शरीर में छोटा सा दिल दिया
जिसमें भावनाएँ भरी प्रेम भरा है रिश्ते नातों को निभाने समझने की क्षमता भी दी...
जिसने लोग अपने हिसाब से अपने व्यवहार से एहसास के माध्यम से वास करते हैं....
लेकिन इस दिल की भी कमजोरी होती है
कोई प्यार से बात करें तुरंत उसी का हो जाता है...
अब समाने वाला कैसा है ये तो हमें नहीं पता होता की
कब क्या करेगा हमने तो अपने दिल एक अच्छी सी छवि बनाई है
अपने दिल में उसी छवि की तरह विश्वास करते हैं...
अब सामने वाले को पता होता है किस बात से
हमारे दिल को चोट पहुंचेगी वो इंसान वही करेगा जिससे हृदय दुःख जाए...
अब तन की पीड़ा तो नहीं लेकिन मानसिक पीड़ा बहुत देता है वो इंसान
इसी लिए इतना हक न देना चाहिए कोई भी हमारा दिल दुखा सके..
जल्द ही समझ आ जाता है की वो इंसान कैसा है उसे छोड़ देना चाहिए
या फिर कोई बात हो दिल पर लो ही मत तभी खुश रह सकते हो...
हम जानते हैं की वो इंसान बहुत ख़ास है
पर इतना भी नहीं की वो चोट देता जाए और हम सहते जाए ...
हमारा जीवन है इतना तो हक किसी भी रिश्ते को नहीं है की
दर्द दे और हम रिश्ते को निभाते जाए उस रिश्ते को ही स्वतंत्र कर देना चाहिए..
