STORYMIRROR

Ruchika Rai

Abstract Inspirational

3  

Ruchika Rai

Abstract Inspirational

इनायत

इनायत

1 min
195

इनायत प्रभु आपकी हो हम पर,

दुख दर्द सब ऐसे मिट जाए 

अँधेरा दिलों का खत्म हो जाये,

सारे जहाँ में रोशनी फैलाये।


न झुके सिर कभी भी शर्म से,

नेकियां हमारी सदा काम आए।

हाथ जब भी उठे मदद के लिए हो,

माँगने की नौबत कभी न आये।


हम ऐसे निखरे इस जहां में जैसे

काँटों के बीच फूल खिल जाये।

मेरा होना मुकम्मल करे मेरे अपनों को,

चोट मेरी वजह से कोई भी न पाए।


कुछ ऐसी इनायत हो प्रभु आपकी,

नेकियों की राह हमें मिल जाये।

खुशियाँ दोनों हाथों से इस जहां में

हम सभी को खुद बाँट आये।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract