इकरार से एतबार तक
इकरार से एतबार तक
इकरार से एतबार तक का सफर बड़ा ही हसीन होता है,
इकरार के बाद जो इजहार करे वही सच्चा प्यार होता है,
जब इकरार हुआ ना उसने कुछ कहा ना मैंने कुछ कहा,
बिना कुछ कहे ही प्यार का सिलसिला आगे बढ़ता रहा ,
कई बार तो रूठने , मनाने में ही सारी उम्र बीत जाती है,
खामोश सी निगाहें उनकी मीठा-सा एहसास दिलाती है,
चल पड़ा हूँ प्रेम के सफर पर अब साथ उनका चाहिए ,
हर मोड़ पर रहे साथ बस हाथों में हाथ उनका चाहिए,
अब तो उनकी यादों में अंधियारी हर रात गुजर जाती है ,
सुबह की किरणों के संग हमें याद उनकी बहुत आती है,
मेरी छोटी सी इस बगिया में बिन मौसम सावन आया है,
प्रेम की बहती सरिता संग हमने ये गीत मल्हार गाया है,
आज जैसे प्रेम रूपी किरण फूट पड़ी हृदय की कोर में,
ये मोहब्बत हमारी रंग लाई देखो ऐसे सुनहले से भोर में,
तुम संग समय बिताया उस सुहानी रात को ना ढलने दो,
चिराग रोशन किए बस इस मन में प्रेम का दीप जलने दो,
याद है जब उन्होंने इस दिल से प्यार का इजहार किया,
तपिश में भी सावन की बारिश बनकर हमसे प्यार किया,
तुम्हारे प्यार के इजहार संग मूक नयनों के इशारे हो गए,
मिलन के वो सभी पल कुछ हमारे तो कुछ तुम्हारे हो गए I

