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Jyoti Astunkar

Abstract Others

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Jyoti Astunkar

Abstract Others

हवाएं भी कुछ कहती हैं

हवाएं भी कुछ कहती हैं

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हवाएं भी कुछ कहती हैं,

कभी गुनगुनाती हैं,

कभी शोर मचाती हैं,

और कभी बस कुछ कह जाती हैं,


गुनगुनाती हवाएं जब बहतीं हैं, 

हममें ख़ुशी जगाती है,

शोर मचातीं बह चले जब,

कशमकश में हमें डाल जाती है,


कभी शीतल तो कभी तीक्ष्ण,

कभी अपनी तो कभी परायी,

कहीं बस बहती चली जाये,

तो कही महसूस भी न कराये,


आभास तो कई देती है,

मन में एक विचार जगा जाती है,

कुछ तो कहना चाहती है,

और हमारे मन में सवाल जगा जाती है


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