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Neeraj pal

Abstract

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Neeraj pal

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हसरत।

हसरत।

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हसरत है तुम्हें पाने की, मजा आता है तुम्हारे विरह में जीने में,

 मैं तुम में फ़ना हो जाऊँ, क्या रक्खा है इस बे-दर्द जमाने में।


 तरसती हैं ये आँखें, सिर्फ तुम्हारे दीदार करने में,

 मिलेगा सुकून तब मुझको, झुका हो शीश तुम्हारे चरणों में।


 धड़कता है यह दर्दे-दिल, सिर्फ तुम्हारी याद करने में,

 दुनिया के सभी रंग है लगते फीके, तुम्हारे रंग में रंग जाने में। 


बिगड़ी जाती है दशा मेरी, रेगिस्तान भरे इस जीवन में,

 जिंदगी गुजर गई मेरी, शान- ए शौकत पाने में।


 मिली जब से नजरें तुमसे, ढूँढता हूँ ख्वाबों में,

" नीरज" की सिर्फ एक ही मंजिल, सिर्फ तुमको ही पाने में।


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