होते हैं कुछ ख्वाब ऐसे
होते हैं कुछ ख्वाब ऐसे
हमसफ़र से होते हैं ख़्वाब हमारे, दिल के करीब होते हैं,
ख़्वाब हो जाएं सब पूरे ऐसे कहांँ सभी के नसीब होते हैं,
ख़्वाबों के अनुरूप ही तो ज़िन्दगी की कल्पना करते हैं,
आंँखों में अपने भविष्य की सुनहरी तस्वीर बना लेते हैं,
ख़्वाबों को हकीकत बनाने की तो चाहत सब में होती है,
पर इन आंँखों को भी कहाँ,ख़्वाबों की ताबीर मिलती है,
होते हैं कुछ ख़्वाब ऐसे, रिश्ता उनसे जुड़ गया हो जैसे,
आ रहा है कोई ख़ास,मुकम्मल होने की राह देखते ऐसे,
और यह इंतजार जब, आंँखों में ही बिखरकर रह जाए,
तो उलझी सी ये ज़िन्दगी किस रहा चले, समझ न पाए,
कहने को तो सभी कहते हैं, हार ना मानो रास्ते बहुत हैं,
पर पूरे नहीं होते जो, वो ख़्वाब आंँखों में चुभते बहुत हैं,
खुद को समेटने की चाहे कितनी भी कर लें हम तैयारी,
दोराहे पर आकर खड़ी हो जाती है यह ज़िन्दगी हमारी,
कभी-कभी परिस्थितियांँ कर देती हैं हमें इतना मजबूर,
कि ना चाहते हुए भी हमें, ख़्वाबों से होना पड़ता है दूर,
पर ख़्वाब कभी मरता नहीं, दिल में दफ़न हो जाता है,
बस मायूस होकर ये मन हमारा, समझौता कर लेता है,
कभी लफ़्ज़ों से तो कभी आंँखो से, छलकते ये ख़्वाब,
अब तुम्हारे सफ़र का, मैं साथी ना रहा कहते ये ख्वाब,
माना ये सफ़र रुकता नहीं किसी ख़्वाब के मर जाने से,
पर दर्द तो होता है मुकम्मल होने से पहले ठहर जाने से,
ज़िंदगी पटरी पे आ भी जाए पर एक कमी तो लगती है,
मंजिल मिल भी जाए तो क्या, कुछ अधूरी सी लगती है,
ज़िन्दगी के किसी पन्ने पर,एक काश तो रह ही जाता है,
धुंधली हो जाती उसकी स्याही, पर निशान रह जाता है।
