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Usha Raghav

Romance

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Usha Raghav

Romance

होश गुम

होश गुम

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हुए होश है गुम मेरे, देखा है जबसे तुमको

कुछ और नज़र आता नहीं, अब इन आँखों को


एक तेरी ही ख़्वाहिशें, इस दिल में बसी है अब मेरे

एक तेरे ही ख़्वाब अब, आँखों में बसते हैं रात दिन


नज़रें तुमको ही ढूँढती हैं मेरी, दुनियाँ में हर तरफ़

ये दिल भी अब मुन्तज़िर तेरा, रहता है हर वक़्त


आईना देख कर अब, मुस्कुराने लगी हूँ मैं अक्सर

और खुद से ही नज़रें अब, चुराने लगी हूँ मैं अक्सर


दुआएं भी तेरे हक़ में सब, माँगने लगी हूँ अब मैं

और सदक़ा तेरी उमर का, उतारने लगी हूँ अब मैं


कॉलेज में किताबों से अब, जी चुराने लगी हूँ मैं

और तकिए के नीचे तेरी तस्वीर, छुपाने लगी हूँ मैं!


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