STORYMIRROR

Sakshi Yadav

Comedy Classics Fantasy

4  

Sakshi Yadav

Comedy Classics Fantasy

होली के रंग खेलने के व्यंग्य

होली के रंग खेलने के व्यंग्य

2 mins
336

आया होली का त्योहार है आया होली का त्योहार है

रंगों की बारिश खुशियों की बौछार है

जानती हूं कि मौसम गुलाबी बहुत है

मगर ऐसी रुत में खराबी बहुत है

मानो मेरी तो ज़रा रुक जाओ

लगाओ गुलाल पर न मुझको भिगाओ

सुहाना है मौसम पर सर्दी की सुबह शाम है


आया होली का त्योहार है आया होली का त्योहार है

आज की ये होली न जाएगी सुखी

साल भर कि तरस जो सही बेरुखी

भिगा देगी आज ये रंगों की होली

संभालो ज़रा ये चुनरी ये चोली

ये एक साल की तरस का मुकाम है

आया होली का त्योहार है आया होली का त्योहार है


खेलूँगी होली भिगेगी ये चोली

रुकेगी नहीं आज ये बहारों की टोली

समा गहरा रहा है

नशा चढ़ रहा है

आओ री सखियों होली है आई

संग खुशी के रंग जो लाई

रंग गुलाल नशा भंग का ये मलाल है


होली वो मथुरा की जो शान है

आया होली का त्योहार है आया होली का त्योहार है

जानते है हम इस खेल की हो तुम अनाड़ी

भिगा देंगे आज तुम्हारी ये साड़ी

इस ओर हम वो ओर ह तुम्हारी

देखे ज़रा किसकी कितनी तैयारी

चढ़ा रंग हमपे तुम्हारी है बारी


आओ री आओ री चाहे सारी की सारी

खड़े गबरू हम जवान है

आया होली का त्योहार है आया होली का त्योहार है

आज न करेंगे ये लाज शर्म ये

आज करेंगे रंगों से हवन रे

मोहन मुरारी रंगे अपने ही रंग में

खेलेंगे होली आज आओ सब संग में

बचके रहना ओ गबरू अब बारी हमारी


रंगेंगे हम की न सूरत आये न पहचान तुम्हारी

थामी चोली तो चुनरी उड़ी सीना तान है

आया होली का त्योहार है आया होली का त्योहार है

आओ आओ सखियों री आओ ज़रा भीगो री

रंगों की ये शान है


प्यार का मौसम है खुशियों की बारिश ये

सयाने दिन सुनहरी शाम है

होली आई होली रे आओ हमजोली रे

करे ज़रा रंगों की बौछार रे

होली है रंगों की होली है खुशियों की

आया होली का त्योहार है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Comedy