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Talat Jamal

Abstract Tragedy Inspirational

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Talat Jamal

Abstract Tragedy Inspirational

होली का त्यौंहार

होली का त्यौंहार

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होली का त्यौहार आया है आज 

बरस रहे हैं रंग दिल में है खटास 


कैसे मना लूँ खुल कर मैं उल्लास 

रुठे हैं सपने मंज़िल है उदास 


घर के मन्दिर में दीपक क्या जलाऊँ 

पड़ोस है मेरा अँधियारे की खान 


नहीं आता है मुझको रीति रिवाज़ निभाना 

नहीं देखा जाता मुझे ग़रीबी और संताप


मैंने ज़िंदगी के ऐसे भी ढंग देखे हैं 

कई मुस्कानों को मजबूरन बेरंग होते देखे हैं 


चुन- चुन के मुझे हर दिल से ग़म की खाई ढानी है 

इस बार मुश्किलों से लड़कर होली मुझे मनानी है


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