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Avneet kaur

Drama Romance Tragedy

4  

Avneet kaur

Drama Romance Tragedy

हमसफ़र

हमसफ़र

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मैं ढूँढती थी हमसफ़र ज़िन्दगी का

ज़िन्दगी में ही उलझ कर रह गई

प्यार तो उनसे कबसे करती थी

पर आज बताकर आ गई


रेत पर नाम लिखा था उनका

उसी रेत को मुट्ठी में लेकर आ गई

प्यार तो उनसे कबसे करती थी

पर आज बताकर आ गई


यह हवा कुछ कह रही थी उनके बारे में

मैं उन हवाओं से बात करके आ गई

प्यार तो उनसे कबसे करती थी

पर आज बताकर आ गई


कुछ गलतियों का गुनाहगार समझती थी उनको

पर उनको आज माफ करके आ गई

प्यार तो उनसे कबसे करती थी

पर आज बताकर आ गई


मैं साथ रहना चाहती थी उनके

पर आज सिर्फ पता पूछ कर आ गई

प्यार तो उनसे कबसे करती थी

पर आज बताकर आ गई


अपनी जान से ज़्यादा प्यार कर बैठी थी उनको

इसलिए खुदा से उन्हें अपनी किस्मत में लिखवा कर आ गई

प्यार तो उनसे कबसे करती थी

पर आज बताकर आ गई।


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