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Gopal Agrawal

Abstract

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Gopal Agrawal

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हमसे दोस्ती करोगी

हमसे दोस्ती करोगी

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हमारे एक दोस्त ने

पेड़ो पर पूछं हिलाकर इधर उधर दौड़ती,

गिलहरी से कहा

हम से दोस्ती करोगी,

हमारे साथ घर पर रहोगी,


कोरोना के चलते लगे लाॅकडाउन से,

मन बहुत ही खराब है,

न दिन में चैन है न रात में आराम है,

कोरोना बीमारी का डर बना हुआ है,

आदमी के उपर खतरा बना हुआ है,


तुम्हारा साथ हो जाएगा, तो मन बहल जाएगा,

बच्चे खुश हो जाएगें, परिवार में संतोष आएगा,

दोस्त ने अपना हाथ गिलहरी की तरफ बढ़ाया,

कूदती, फुदकती गिहलरी ने अपनी पूंछ को हिलाया,

पूंछ हिलाकर मुस्कुरा कर वह सुंदर आवाज में बोली,


संकट का समय है दोस्ती का रिश्ता तो निभाऊँगी,

अपने साथियों के साथ परिवार के संकट मिटाउंगी।


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