STORYMIRROR

Mrs. Mangla Borkar

Tragedy Classics

4  

Mrs. Mangla Borkar

Tragedy Classics

हमारा ख़ज़ाना

हमारा ख़ज़ाना

1 min
199

हमारा खजाना कहाँ खो गया

किसको पाकर जग दिवाना हो गया

गौर से देखा तो वह पत्थर निकला

पत्थर के लिए खून खराबा हो गया


हमारा ख़ज़ाना कहां खो गया

मैंने कहा ये हमारा ख़ज़ाना नहीं है प्यारे

क्यों इसके लिए मरते मारते हो तुम सारे

भाई भाई का दुश्मन इसके लिए हो गया


हमारा ख़ज़ाना कहां खो गया

हमारा ख़ज़ाना भाई- भाई के प्यार में था

गीता, रामायण, बाईबल और कुरान में था

यह तो तुम लोगों से खोजा न गया


हमारा ख़ज़ाना कहां खो गया

अपने नैतिक मूल्यों को अब अपनाओ

अपने समाज को तुम खुशहाल बनाओ

माता-पिता की सेवा में ये तो पाया गया

अब ये ख़ज़ाना हमारा हो गया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy