Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Shalini Dikshit

Inspirational


2  

Shalini Dikshit

Inspirational


हम तीन

हम तीन

1 min 182 1 min 182

वो तीन सखियां हैं या बहने

कोई नहीं समझ पाता था।

वो तीन एक हैं या जुदा जुदा

कोई नहीं जान पाता था।

तीनों जिधर से निकले

एक उजाला सा छा जाता था।

उनकी खूबसूरती के सामने मानो

चांद भी फीका पड़ जाता था।

उनका गोरा रंग जैसे

चांदनी को भी मात दे जाता था।

उनकी आंखों की उदासी को

कोई नहीं भांप पाता था।

जब तीनों मिल कर देखती थी

अपनी गुजरी हुई माँ की तस्वीर

तब ग़म भी उन से घबरा जाता था।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Shalini Dikshit

Similar hindi poem from Inspirational