हम कौन है?
हम कौन है?
हम चिल्लाएंगे नहीं की हम कौन है?
तुम सिर्फ जान लेना की हम कौन है?
वैसे तो अपनी तुम्हें इंसानियत बतायेंगे
वर्ना हमे भी नहीं पता की हम कौन है?
तुम हमे बचपन मे पूछते तो बताते
जवानी में आ जाना की हम कौन है?
हमारे पास तो वैसे कुछ नहीं रखा
रंग-ए-सुखन से जाना की हम कौन है?
हमे अपना काम नहीं बताया गया
इसीलिए हम पूछते है की हम कौन है?
न मानने की जिद्द है हमारी, यानी
मानने से भी नहीं जाना की हम कौन है?
हम तो जानते भी नहीं है खुदको
और औरों ने बता रखा है की हम कौन है?
गुस्से गुस्से मे खुदको बड़ा मान फिर
खामोश होकर सोचूंगा की हम कौन है?
जो देख रखा है वो सच तो नहीं
जो देखा ही नहीं उससे सोचेंगे की हम कौन है ?
रखा है जो भ्रम उसे तोड़ेंगे सच जानकर
सबको जुठ बतायेंगे की हम कौन है?
ये जुठे जुठे ख्वाब देखकर उठेंगे
तब शायद पता चलेगा कि हम कौन है?
आदिमानव से इंसान बने फिर भी
वहीं सवाल उठता है की हम कौन है?
