STORYMIRROR

Vivek Agarwal

Romance

4  

Vivek Agarwal

Romance

हम दोनों

हम दोनों

1 min
438

हम दोनों नदिया के तीरे

मध्य हमारे अविरल धारा

अलग अलग अपनी दुनिया पर

अनाद्यनंत रहे साथ हमारा


अलग अलग अपनी राहें हैं

अपनी अपनी जिम्मेदारी

अपनी खुशियां, अपने दुःख हैं    

फिर भी अपनी साझेदारी


कभी कोई पर्ण मेरे तट से

तेरे तट तक बह जाता है

अनकही बातों को मेरी

कान में तेरे कह जाता है


और कभी हवा का झोंका

तेरे तट से आ जाता है

तेरी श्वासों की खुशबू से

मेरा तट महका जाता है.

  


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance