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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Inspirational

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Inspirational

हिसाब

हिसाब

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कर्म गति सबसे है न्यारी,

हिसाब में न चलती यारी ।


हिसाब क्या करेगा कोई ,

चुका सकोगे पाई-पाई ।

3 ऋण जो संग ले चले,

उऋण हो सकोगे भाई ?


देव , ऋषि , पितृऋण,

हो सकोगे क्या श्रवण?

कर्म गति सबसे है न्यारी,

हिसाब में न चलती यारी ।


न कोई राजा न कोई रंक ,

सभी का चुकता पूरा अंक।

किस-किस का हिसाब बाकी,

सांसें भी देखो अब हैं थाकी।


पंचतत्व कर्ज ही है काफी,

माँ ने कर उऋण दी माफी।

कर्म गति सबसे है न्यारी ,

हिसाब में न चलती यारी ।


जीवित पितृ का हो सम्मान ,

इससे बड़ा न कोई है ईमान।

स्वाध्याय ही ऋषिकुल ज्ञान,

मानव सेवा ही धर्म महान ।


देश हितार्थ जो देता जान ,

देव भी होते उस पर कुर्बान। 

कर्म गति सबसे है न्यारी ,

हिसाब में न चलती यारी ।

  


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