हिसाब
हिसाब
कर्म गति सबसे है न्यारी,
हिसाब में न चलती यारी ।
हिसाब क्या करेगा कोई ,
चुका सकोगे पाई-पाई ।
3 ऋण जो संग ले चले,
उऋण हो सकोगे भाई ?
देव , ऋषि , पितृऋण,
हो सकोगे क्या श्रवण?
कर्म गति सबसे है न्यारी,
हिसाब में न चलती यारी ।
न कोई राजा न कोई रंक ,
सभी का चुकता पूरा अंक।
किस-किस का हिसाब बाकी,
सांसें भी देखो अब हैं थाकी।
पंचतत्व कर्ज ही है काफी,
माँ ने कर उऋण दी माफी।
कर्म गति सबसे है न्यारी ,
हिसाब में न चलती यारी ।
जीवित पितृ का हो सम्मान ,
इससे बड़ा न कोई है ईमान।
स्वाध्याय ही ऋषिकुल ज्ञान,
मानव सेवा ही धर्म महान ।
देश हितार्थ जो देता जान ,
देव भी होते उस पर कुर्बान।
कर्म गति सबसे है न्यारी ,
हिसाब में न चलती यारी ।
