Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

GOPAL RAM DANSENA

Abstract


4  

GOPAL RAM DANSENA

Abstract


हे गुरूजन

हे गुरूजन

1 min 221 1 min 221


हे गुरूजन शत शत नमन ,

तेरे जीवन और जीवन पथ को I

तेरी महिमा है अंबर सम,

नव गति दे जो जीवन रथ को I


इस सूरज चांद के आगे,

तेरी कल्पना साकार रूप ले रहा है I

नित पल्लवित हो रहा तेरी भाव,

चाहे मौसम के छांव धूप रहा है I


ज्ञान और प्रगति का दीप जल रहा,

तेरी रूह और नाम से यहाँI

धन्य धन्य तेरी गति सफल रहा,

युगों की सुबह और शाम से यहाँ I


प्रकृति के दुर्गम नीरवता में,

तू सुर बना जीवन वीणा की।

मानव की निर्मम मानवता में,

तू स्वर बना सुर तुलसी मीरा की I


प्रतिक्षण सरल है तू,

तेरा वर्णन फिर भी सरल न बने I

तेरा सम्मान रहे युगों तक,

तू कभी जीवन गरल न बने I


हे गुरूजन शत शत नमन ,

तेरे जीवन और जीवन पथ को I

तेरी महिमा है अंबर सम,

नव गति दे जो जीवन रथ को I

  


Rate this content
Log in

More hindi poem from GOPAL RAM DANSENA

Similar hindi poem from Abstract