Gunjan Johari
Fantasy Inspirational
हार गई मैं,
पर जीतने की कसक अभी बाकी है,,
करनी है फिर कोशिश ,
खेलने की बारी अब हमारी है,,
कोशिश की हार नहीं होती ,
यह मैं ने सीख लिया,,
मैदान में अब हम हैं ,
इस लिए "जीत" हमारी है,,
खामोश नज़रों ...
चुप्पी
एक दूसरे को प...
चांदनी
अधूरी दुआ
मै मौन हो जात...
थक गए दौड़ते ...
मुसाफ़िर
खाली हाथ
मुद्दतों
झूम उठते है पेड़-पौधे नई अंकुर देती है, तेरे बरस भर जाने से झूम उठते है पेड़-पौधे नई अंकुर देती है, तेरे बरस भर जाने से
घृणा विरोध प्रतिबंध मिला कभी, तो कभी मिली भीषण अग्नि की भेंट। घृणा विरोध प्रतिबंध मिला कभी, तो कभी मिली भीषण अग्नि की भेंट।
और इस सोच में फिर एक बार कलम रगड़ रही थी। अपनी सोच को सुचारू और जीवन मे हलचल भर रही थी। और इस सोच में फिर एक बार कलम रगड़ रही थी। अपनी सोच को सुचारू और जीवन मे हलचल भ...
कभी अपनों से तो कभी परायों से अनबन है, ऐसे हालात में लहू जिगर का पी रहा हूं। कभी अपनों से तो कभी परायों से अनबन है, ऐसे हालात में लहू जिगर का पी रहा हूं।
ख्वाहिशों की बलि देकर जिम्मेदारियों का एहसास बताया जाता है, ख्वाहिशों की बलि देकर जिम्मेदारियों का एहसास बताया जाता है,
ज़िन्दगी का ज़्यादा तर्जुबा तो नहीं है, सलीका जीने का आज भी सीख रही हूँ मैं, ज़िन्दगी का ज़्यादा तर्जुबा तो नहीं है, सलीका जीने का आज भी सीख रही हूँ मैं,
जी भर पी लो इन नयनों से आज की रात गैर के हाथों से कशिश का जाम मत लेना जी भर पी लो इन नयनों से आज की रात गैर के हाथों से कशिश का जाम मत लेना
सोचता हूँ हाल-ए-दिल, बयां करके देखूँ... सोचता हूँ हाल-ए-दिल, बयां करके देखूँ...
भक्त भगवान को कर देते हैं आस्था की प्रतिमूर्ति..... भक्त भगवान को कर देते हैं आस्था की प्रतिमूर्ति.....
हर्ष उल्लास से कट जाती है जज्बा-जुनून हो तन मन..... हर्ष उल्लास से कट जाती है जज्बा-जुनून हो तन मन.....
कहाँ से शुरु कहाँ ख़त्म होगी ये कहानी प्रेम की दुनिया में बड़ा बवाल कर गया कहाँ से शुरु कहाँ ख़त्म होगी ये कहानी प्रेम की दुनिया में बड़ा बवाल कर गया
विविधता में एकता के मिलकर गीत गाते यहां भारत की लाज बचाने तन-मन-धन लुटाते यहां विविधता में एकता के मिलकर गीत गाते यहां भारत की लाज बचाने तन-मन-धन ल...
अंगड़ाइयों से आमंत्रण देना किसी न किसी बहाने से मेरे इर्द गिर्द चक्कर लगाना अंगड़ाइयों से आमंत्रण देना किसी न किसी बहाने से मेरे इर्द गिर्द चक्कर ल...
क्यों अपना घरबार त्याग कर, मैं अपना संसार त्यागकर फिरती रहूँ घने वनों में, मोह माया प क्यों अपना घरबार त्याग कर, मैं अपना संसार त्यागकर फिरती रहूँ घने वनों में, म...
जीवन की खुशियाँ फिर से एक बार हां, फिर से एक बार ! जीवन की खुशियाँ फिर से एक बार हां, फिर से एक बार !
सिवा इसके कि कल अकेला था आज कोई मिल गया है चलते चलते सिवा इसके कि कल अकेला था आज कोई मिल गया है चलते चलते
बेखौफ़ पर्वतों से टकराती मचलती और बरसती बूँदों की करती यात्रा। बेखौफ़ पर्वतों से टकराती मचलती और बरसती बूँदों की करती यात्रा।
अंधेरी रात की संकरी पगडंडियों में आशाओं के कुछ दीये जलाकर रक्खे हैं अंधेरी रात की संकरी पगडंडियों में आशाओं के कुछ दीये जलाकर रक्खे हैं
ना मेरे कभी कदम बढ़े और ना तुम अम्बर से उतरे। ना मेरे कभी कदम बढ़े और ना तुम अम्बर से उतरे।
हरा भरा रहे सबका परिवार, मनाओ सभी दशहरा का त्यौहार। हरा भरा रहे सबका परिवार, मनाओ सभी दशहरा का त्यौहार।