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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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गुरु ज्ञान

गुरु ज्ञान

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गुरू ज्ञान से राहें संभल जाती है। 

एक, दो नहीं हर मुश्किल सुलझ जाती है।


अवसरों के दरवाजे खुलते हैं। 

संभावनाओं से हाथ मिलते हैं। 


इरादों की मशाल बुझती नहीं

गुरु की छत्रछाया जब छूटती नहीं। 


टूटना नहीं जुड़ना सिखाते हैं। 

सत्य को सत्य कहना बताते हैं।


गुरु है हमारे। 

हमें हर हाल में चलना सिखाते हैं।


गुरु ने हमारा कद बढ़ाया है। 

मान-सम्मान का हकदार बनाया है।


 गुरु ज्ञान है। गुरु विज्ञान है। 

गुरु की सूझबूझ से ही हमारा हो रहा कल्याण है।


सपनों को धरातल दिया है। 

ग्लानि भाव से गुरु ने हम सबको मुक्त किया है।


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