STORYMIRROR

Supreet Verma

Abstract Romance Fantasy

3  

Supreet Verma

Abstract Romance Fantasy

गुमनाम मुस्कुराहट

गुमनाम मुस्कुराहट

1 min
208

गुमनाम है फिर भी क्यूं बदनाम है

चली गई पर अब भी कहीं निशान है

ढूँढना, मुश्किल नहीं आसान है

देखना, वो पागल नहीं नादान है ।।


गम से भरा चेहरा है पर हंसाता है

लटके हुए चेहरों में खुशियां लाता है

है भीड़ में फिर भी अकेला पाता है

वो गुमनाम है पर सबकी दुनिया सजाता है 


आहट से उसकी होती तो घबराहट है

पर देख कर दिल खुशनुमा हो जाता है

है हल्का सा पर दर्द सभी भुलाता है

देखी है क्या वो हल्की सी हँसी

जिस पर दिल भी फिदा हो जाता है।।।


गुमनाम है पर भी क्यूं बदनाम है।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract