गर्व है मुझे .. मैं एक माँ
गर्व है मुझे .. मैं एक माँ
मैं एक माँ हूँ
जननी हूँ
गर्व है मुझे
मेरा अंश भी इस देश का रक्षक है ।
मैंने जन्म लिया जब ..
इस धरा पे पाँव रखा ..
पहला सबक़ जो समझा और जाना था
वो बस इस धरती माँ के
मान को बढ़ाना था ….
बस इसी सबक़ को याद रखा
दुनिया में आ के …..
उस प्रभु के सौंपे काम का मान रखा …
जननी होने के सौभाग्य को यूँ निभाया मैंने ….
उस के दिए वरदान को अपने देश का रक्षक बनाया मैंने …
माँ हूँ …. जननी हूँ
अपना फ़र्ज़ निभाया मैंने ….
प्रहार है ………
उन सब की आत्माओं पर ..
जो एक प्रश्न चिन्ह लगाते है ..
शूरवीरों के शौर्य को …
जो यूँ ..आज़माते है …
कभी ठंड में ठिठुर कर देख लेना,
कभी तपती धूप में जल कर देख लेना,
कैसे होती है हिफाज़त मुल्क की,
कभी सरहद पर चल कर देख लेना।
समझ में ना आए तो
उस माँ के दिल को टटोल लेना
कितना दर्द सह के उस ने
जन्म दिया एक लाल को …
नींद त्याग के भूख त्याग के
अपने हर एक पल का यूँ बलिदान दिया …
फिर अपने जिगर के टुकड़े को भेज दिया सरहद पे …
रक्षा करे …उन की ….
रचना है जो …..उस के भगवान की ..
आओ झुककर सलाम करें उन्हें,
जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है
खुशनसीब होता है वो खून,
जो देश के काम आता है।
