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Dhan Pati Singh Kushwaha

Inspirational

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Dhan Pati Singh Kushwaha

Inspirational

गरीबी-अमीरी सदा न रहे

गरीबी-अमीरी सदा न रहे

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प्रकृति में भी विविधता ,

मिलती ही है हर कहीं।

जगत में दो चीज़ें कभी,

एक सी तो हैं होती नहीं।

गतिशील सारा जगत है,

कुछ एक सा रहता नहीं।

गरीबी-अमीरी सदा न रहे,

अदलती-बदलती रहती यहीं।


बदलती रहती सारी दुनिया ,

बदलते हुए समय के ही संग।

कल के पक्के मित्रों के बीच,

कभी भी हो सकती है जंग।

बचपन से बुढ़ापे तक बदलती,

सोच तक सदा एक रहती नहीं।

गरीबी-अमीरी सदा न रहे,

अदलती-बदलती रहती यहीं।


सुखी हों दुःखी हों निर्धन या धनी,

मानववृत्ति आभूषण है मानव का।

वृक्ष झुक जाते हैं पाकर के फल ,

अहंकार होना स्वभाव है दानव का।

अपरिग्रह -अहिंसा का पालन जो हो,

अखिल विश्व में शांति मिले हर कहीं।

गरीबी-अमीरी सदा न रहे,अदलती-बदलती रहती यहीं।


कोई न कुछ लेकर के आए थे यहां,

और ही कोई न कुछ लेकर जाएंगे।

निज आचरण-व्यवहार के बल पर,

अपयश या यहां हम यश कमाएंगे।

ऐश्वर्य-दौलत और धन क्षणभंगुर है,

नेकनामी-बदनामी की अमरता रही।

गरीबी-अमीरी सदा न रहे,अदलती-बदलती रहती यहीं।


भौतिक पूंजी आपदा में सदा साथ दे न सके, 

आचरण -वृत्ति से आपकी बनती है पहचान।

भवन- दौलत -स्वर्ण-माणिक्य साथ देते नहीं,

आपदा आती जब भागते हैं बचाने को जान।

निरापद जीवन है इनके सीमित उपभोग तक,

जनती है दुश्मन जान का खतरा बढ़ाती यही।

गरीबी-अमीरी सदा न रहे,अदलती-बदलती रहती यहीं।


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