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Dr. Natasha Kushwaha

Inspirational Thriller Children

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Dr. Natasha Kushwaha

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गणतंत्र दिवस समारोह

गणतंत्र दिवस समारोह

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सौम्य सवेरा!

छंद-मनहरण घनाक्षरी!


भास्कर भारत भाग, गणतंत्र गीत राग, 

सुखद दिवस नव, 

विदा दें राकेश को!


शरणदायिनी धरा, सुधामयी सुखदात्री, 

ऋषि भूमि जग माने, 

भारत संदेश को!


वत्स पूर्व देव बसे, दक्षिण पश्चिम सजे, 

तरसते सब चाहे, 

उत्तर प्रवेश को!


राम श्याम जहाँ जन्म, बुद्ध व विवेकानन्द, 

बहती पावन गंगा, 

धन्य कहें देश को!! 1!!


देश में लगाये आँख, कपटी है भाई पास

नजरें चुड़ैल वाली, 

कहते संसार है!


दो दो सीमा एक साथ, गीदड़ के दाँत दिखे, 

देश ललकार उठे, 

आँख सीमा पार है!


जवान वो भारत के, तकते तैयार खड़े,

तन में अंगार भर, 

खौले रक्त धार है!


तिरंगा पकड़ वत्स, शून्य जहाँ तापक्रम, 

गाड़ जरा जोर चाहे, 

मृत्यु भी स्वीकार है!!2!!


गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ!


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