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गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Classics Inspirational

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गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Classics Inspirational

ग़ज़ल...११

ग़ज़ल...११

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सितम वो पुराना मिला है तुम्हीं से।

ग़मों का तराना मिला है तुम्हीं से।


सुना है ख़ुदा ने ख़ुशी बस हमें दी,

कि रोता ज़माना मिला है तुम्हीं से।


सभी डूबते ग़म नशीं हो जहॉं पर,

नदी का मुहाना मिला है तुम्हीं से।


जुड़े ईंट पत्थर सभी साथ छोड़ें,

कि बिखरा घराना मिला है तुम्हीं से।


जहॉं लोग अपने पराए हुए हैं,

सफ़र ये सुहाना मिला है तुम्हीं से।


ज़मीं से ख़ुशी खोद कर हम निकाले,

ग़मों का छुपाना मिला है तुम्हीं से।


दिले बाग़बां आज 'गुलशन' रुलाए,

इसे मुस्कुराना मिला है तुम्हीं से।


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