गिला
गिला
यूं नहीं रोज़ मुझको गिला दीजिए!
प्यार से ए सनम मुस्कुरा दीजिए
छोड़ो भी अब ख़फ़ा होना यूं रोज़ अब
जीस्त में प्यार का गुल खिला दीजिए
गैर आँखें नहीं यूं करो तुम सनम
प्यार की आँखें मुझसे मिला दीजिए
टूटने से भी टूटे नहीं जो कभी
प्यार का रोज़ वो सिलसिला दीजिए
प्यार का फूल दो चाहिए तुम न दें
हाले दिल अपना अच्छा सुना दीजिए
प्यार का चढ़ गया है तुम्हारे बुखार
प्यार की अपने मुझको दवा दीजिए
छोड़िये बात करनी दग़ा की सनम
उम्रभर के लिए ही वफ़ा दीजिए
छोड़कर आज़म को जा रहे हो नगर
की नहीं दिल से अपने भुला दीजिए
