गीत वही फिर गाओ ना ....
गीत वही फिर गाओ ना ....
जिसको सुनकर मन की सारी पीड़ाएं बह जाती थी,
जिसको सुनकर प्राणों मैं एक नयी चेतना आती थी,
प्रज्वलित करो वही अग्नि फिर, भावों को सुलगाओ ना,
गीत वही फिर गाओ ना ....
कब से रूठी बैठी हूँ मैं, जग से रूठी बैठी हूँ मैं,
भर दो एक उत्साह ह्रदय मैं, फिर से मुझे मनाओ ना ,
गीत वही फिर गाओ ना ....
मन वन पर है पतझड़ छाया, हर बयार ने मन झुलसाया,
भिगो दो नयन अश्रुधारा से, मन का मौसम दोहराओ ना,
गीत वही फिर गाओ ना...
झूठे नातों ने भरमाया, पग पग पर स्नेह मेरा ठुकराया,
आज साथ दे कर के मेरा, भ्रमों को झुठलाओ ना,
गीत वही फिर गाओ ना...
अब जो छूटा ना आएगा, अब जो खोया ना पायेगा,
कह दो कुछ शब्द अनकहे से, स्वप्नों को पंख लगाओ ना,
गीत वही फिर गाओ ना...
गीत वही फिर गाओ ना...
