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✨Nisha yadav✨ " शब्दांशी " ✍️

Tragedy Thriller

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✨Nisha yadav✨ " शब्दांशी " ✍️

Tragedy Thriller

घूंट जहर के

घूंट जहर के

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कचोटती हैं जाने कितनी दुनिया भर की बातें 

सिसकियों में कट जाती हैं जाने कितनी रातें


कोई सुन नहीं पाता है वो खामोशी भरी चीख

जो उठती तो है पर दे नहीं पाती आवाज़ें


मन की एक पीड़ा जो कहा ना जा सके

सुनने पर भी कोई जिसे समझ ना सके


कितनी ही ऐसी बातें खुद में समेटे

एक लड़की जी लेती है पीकर घूंट ज़हर के


कभी दुनिया की बातें तो कभी रस्मों के वादे

बांध देते हैं उसे जाने कितने कसमों के नाते


घुटन सी होती है तो भी जी जाती है

सब कहते हैं लड़कियां देवी बनकर आती हैं


उसकी क़िस्मत उसके सिवा हर कोई लिख सकता है

लेकिन उसे अपनी ज़िंदगी जीने का अधिकार कहां मिलता हैं


कुछ अपनों की बातों से दिल दुख जाता है

तो कुछ कमी पराए भी पूरी कर जाते हैं


आज़ादी क्या होती है ये हमें कहां मालूम है

हमारी ज़िंदगी के फैसले बिन बताए ले लिए जाते हैं


क्यों कोई दूसरा करे हमारी ज़िंदगी के फ़ैसले

हमें क्या इतना भी रहा कोई अधिकार नहीं


लड़की होना ख़ुद में एक गर्व है

कमज़ोर होने की ये है कोई पहचान नहीं


माना कि कलाइयां कोमल हैं

जिनमें चूड़ियां खनकती हैं


मगर सच ये भी है कि हम

हर दर्द से लड़ना मां के पेट से ही सीखती हैं


कर ले कोई कितना भी बुलंद अपना हौसला

हम वो पंछी हैं जिनका कोई तोड़ नहीं सकता घोसला


दर्द सहना हमारी फितरत है तो ख़ामोश रह जाती हैं

जिस दिन मुंह खुला उस दिन हम कयामत बन जाती हैं


हम खुद में एक वो ज्वाला हैं जो ख़ामोशी में भी शोर है

अभी हम चुप हैं बस, समझो अभी दुनिया का दौर है।


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