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Rachna Vinod

Abstract

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Rachna Vinod

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गहरी ऊंचाई

गहरी ऊंचाई

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सागर की गहराई में

ऊंचे-ऊंचे पर्वतों पर

विचरित एक -दूसरे से अनजान

अपनी-अपनी ज़िन्दगी जीते 

बिना किसी में दख़लंदाज़ी करते

साथ-साथ तैरते

तलहटी में विविधा लिए

पेड़-पौधों की ओट में

छुप्पा-छुप्पी खेलते 

बेधड़क जलचर

बेहद शोख बेहद मोहक 

अनगिनत रंगों से

सजी-बसी दुनिया में

मेरी स्वप्निल सोच

ऊपर से 

अथाह सीमारहित

जाहिरा नि:शब्द शांत

भीतर से 

जलधि में निहित

चुलबुले धड़कते विस्तृत संसार में 

अपनेपन की गर्माहट में

अनदेखे अनुभवहीन ज़िन्दगी में

गहराईयों की ऊंचाई देखते-देखते

ऊंचाइयों की गहराई देखते-देखते 

आनन्दमय चकित होती हूं तैरते-तैरते।

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