घर
घर
जहाँ प्यार और आशा की किरण दिखाई दे
हर रिश्ता अनमोल बच्चों की चहक सुनाई दे
जहाँ सुख-दुःख सब साथ मिलकर बाँट लेते
घर कहते हैं उसे जहाँ हर रिश्ता दिखाई दे
बड़ों के आदर और प्रेम ने सींचा हो जिसे
प्रेम का मंदिर है जहाँ खुशियाँ दिखाई दे
जहाँ अपनों के लिए पनपते हो सपने
घर कहते हैं उसे जहाँ सिर्फ स्वर्ग दिखाई दे
आराम की जगह, शांति का निवास कहलाता
यहाँ एक की चिंता और दुःख सबको दिखाई दे
मिलते संस्कार जहाँ और होता बड़ों का आदर
घर कहते उसे जहाँ संबंधों का बंधन दिखाई दे
घर है वो संस्कारों की धरती, आदतों की जड़,
विरासत में मिला वो शिष्टाचार दिखाई दे
धर्म और नैतिकता पाठ हमें सिखाता
घर कहते उसे जहाँ पुरखों का सम्मान दिखाई दे
सपनों का किनारा, आशा का खुला आकाश
जहाँ उड़ते संगीत की मधुर लहरों सुनाई दे
हंसी और खुशियों की खुशबू फैली हो चारों ओर
घर कहते उसे जहाँ मिलावट न दिखाई दे।
