घर किसे कहते हैं
घर किसे कहते हैं
ईंटों से दीवार बनी
रेत, सीमेंट और बजरी डली
कमरों पे थी मज़बूत छत
बगिया भी खूब सजी
पर इस चार दीवारी को
‘घर’ नहीं कहते हैं
ईंट पत्थर के इस ढांचे को
‘मकान’ कहा जाता है
घर बनता है परिवार से
जिसमें प्रेम से रहा जाता है
दीप-धूप जिसमें जगे
अच्छे-अच्छे पकवान बने
प्यार और सम्मान हो जिसमें
हर त्यौहार खुशहाल बने।
