गाय का व्यपार
गाय का व्यपार
किसान तू भी पापी हो गया
जरा से दूध के चक्कर में
गाय के बच्चे का हत्यारा हो गया।
जरा सी बात मानी होती
सारे दूध में से कुछ बूंद
बच्चे के मुंह में डाली होती।
अब क्यों पछताना रे किसान
ले फिर से सबेरा हो गया
जरा से दूध के चक्कर में
गाय के बच्चे का हत्यारा हो गया।
सुबह नहीं तो शाम पिलाता
मेरी साथ ये कैसा जुल्म ही गया
नौ महीने गर्भ में पाला सोच जरा
किसान तू इतना खुदगर्ज
कैसे हो गया।
मैं यूं ही ताक ताक रह जाती
बच्चा कित खो गया
जरा से दूध के चक्कर में
गाय के बच्चे का हत्यारा हो गया।
अपने बेटे से दुलार कर
मेरा धूप में छोड़ दिया।
मुझे लालच में पानी पिलाया
मेरा बच्चे को प्यासे का ही मुंह मोड़ दिया
रोई मैं भी बहुत थी
बच्चा मेरा भूख से सिकोड़ दिया।
भले चार पैसे कमाए तूने
पर एक बच्चा अपनी माँ को
जिंदगी भर छोड़ गया
जरा से दूध के चक्कर में
गाय के बच्चे का हत्यारा हो गया।
अब किसान ना रहा तू
गाय का व्यापार हो गया
जिस गाय ने किसान के परिवार को पाला
मैं उसी गाय के बच्चे का हत्यारा हो गया।
ममता की ममता को भी तोड़ा तूने
जिसे गौ माता कहते उसे भी नहीं छोड़ा तूने
चंद पैसे की खातिर
इस के बच्चे को भूखा छोड़ा तूने।
ममता भरे बच्चे से
दूर दूर ही रह गई मैं
बच्चे की लाश देख कर
छिन्न भिन्न हो गई मैं।
दूर पड़ा है मुझ से
रो रो कर मर गई मैं।
ज़रा से दूध के चक्कर में
गाय के बच्चे का हत्यारा हो गया
अपने बेटे से दुलार कर
मेरा धूप में छोड़ दिया।
भले चार पैसे कमाए तूने
पर एक बच्चा अपनी माँ को
जिंदगी भर छोड़ गया
जरा से दूध के चक्कर में
गाय के बच्चे का हत्यारा हो
गया।
