तकलीफ
तकलीफ
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मै तकलीफ मेे जी रहा था
तकलीफ मुझे अच्छी लगी
तकलीफ मेे तकलीफ बोली
ना तेरा कोई अपना है ना तेरा होगा
दुःख मेे दुःख की बात यहां है
जो अपने थे वे कब कहा है
मा के सिवा कोई तेरा अपना नहीं होगा
दुख मेे जो खड़े होते थे
जाने वे लोग अब कहां हैं!
तकलीफ को भी तकलीफ हुई
जब भरा परिवार एक तरफ खड़ा रहा
तू अकेला एक तरफ पड़ा रहा.
मैं तो अपना फर्ज निभाती रही
तुझे धीरे धीरे खाती रही
तू नादान रहा अपनो पर कुर्बान रहा
तुझे जरूरत थी थोड़े पानी की
तू पड़ा बेजान रहा!
देख बन्दे कर्म कर्म का खेल है
कभी तू बेजुबान को मार कर खाता था
आज मै तुझे खा रही हूं
तेरा मुझ से कुछ लेना नहीं है
बस दो पल का तेरे से मेरा मेल है।
