Sandeep Saras
Classics
राहें पथरीली हों, गन्तव्य न छोड़ेंगे,
ये अधर सत्यता का, मन्तव्य न छोड़ेंगे।
दक्षिणा अंगूठे की, हे द्रोण भले ले लो,
एकांत साधना को, एकलव्य न छोड़ेंगे।
भगवान बेचता ह...
खेल जिंदगी है
पाठशाला में र...
तू मुझे सम्भा...
तुम्हारी नींद...
नहीं बचे यदि ...
यह मतदान हमार...
ढूँढते रह जाओ...
अरमान तिरंगा ...
रंग लायी हो तो रंग दो सबको एक रंग में प्यार के। रंग लायी हो तो रंग दो सबको एक रंग में प्यार के।
मंदिर मस्जिद को अपनाई रे दिल मे दुनिया-जहान को समायी रे मंदिर मस्जिद को अपनाई रे दिल मे दुनिया-जहान को समायी रे
Unity in diversity. Unity in diversity.
प्यार से समझाती भैया को यदि करता वो कोई बवाल। प्यार से समझाती भैया को यदि करता वो कोई बवाल।
थोड़ा सा गौर करने के बाद मैंने मन की सुनी बाहर खड़े मेहमान का खुशी से स्वागत किया और थोड़ा सा गौर करने के बाद मैंने मन की सुनी बाहर खड़े मेहमान का खुशी से स्वा...
धर्मराज ही निकले पांडवों में होशियार शांती से उत्तर देकर किया यक्ष को संतुष्ट धर्मराज ही निकले पांडवों में होशियार शांती से उत्तर देकर किया यक्ष को संतुष्ट
बस एक सवाल उठा है ज़ेहन में अब, क्या वो मैं था या हूँ मैं अभी। बस एक सवाल उठा है ज़ेहन में अब, क्या वो मैं था या हूँ मैं अभी।
अपने रंग में श्याम ने रंगाई। आई आई झूमके होली आई। अपने रंग में श्याम ने रंगाई। आई आई झूमके होली आई।
फुर्सत मिले तो आ जाना पिचकारी लिये जिन्दगी में। फुर्सत मिले तो आ जाना पिचकारी लिये जिन्दगी में।
हे काली मांँ हमारे संकट हरो इस वायरस से सभी को मुक्ति दो। हे काली मांँ हमारे संकट हरो इस वायरस से सभी को मुक्ति दो।
पुछो ना इस त्योहार की कितनी सुन्दर गाने दुश्मन भी दुश्मन को इस दिन अपना माने। पुछो ना इस त्योहार की कितनी सुन्दर गाने दुश्मन भी दुश्मन को इस दिन अपना...
नाम से सभी लोग पुकारते यही उनकी असली परिणाम। नाम से सभी लोग पुकारते यही उनकी असली परिणाम।
है कितने रूप तेरे माँ जग में सबसे प्यारी तू है कितने रूप तेरे माँ है कितने रूप तेरे माँ जग में सबसे प्यारी तू है कितने रूप तेरे माँ
लड़ रहा बस ये वक़्त हैं अपनी रफ़्तार से चल रहा। लड़ रहा बस ये वक़्त हैं अपनी रफ़्तार से चल रहा।
सब खेले, कुदे, नाचे, गाये मस्ती भरी होली मनाये। सब खेले, कुदे, नाचे, गाये मस्ती भरी होली मनाये।
कितना सुन्दर मंजर होता कोई बिछाता रंगों का जाल। कितना सुन्दर मंजर होता कोई बिछाता रंगों का जाल।
भाँग का जब पीते प्याला, होली है कह नाचे मतवाला। भाँग का जब पीते प्याला, होली है कह नाचे मतवाला।
अपनी हर बातों को भूलकर सिर्फ प्यार के रंगों में है रंगता। अपनी हर बातों को भूलकर सिर्फ प्यार के रंगों में है रंगता।
राधे सब है समझती तुम न समझना उसको भोली। राधे सब है समझती तुम न समझना उसको भोली।
था उसका एक पुत्र प्रहलाद नाम था जिसका जपता था हर घड़ी प्रभु को यही जुनून था उसका था उसका एक पुत्र प्रहलाद नाम था जिसका जपता था हर घड़ी प्रभु को यही जुनू...