Sandeep Saras
Inspirational
पानी का स्तर घटा, जनता है बेहाल।
समाधान कैसे करें, सबसे बड़ा सवाल।
सबसे बड़ा सवाल, भूख से प्यास बड़ी है।
पर्यावरण विनाश, समस्या हुई खड़ी है।
पानी की चहुँ ओर, मचेगी खींचा-तानी।
नहीं बचे यदि पेड़, मिलेगा कैसे पानी।।
भगवान बेचता ह...
खेल जिंदगी है
पाठशाला में र...
तू मुझे सम्भा...
तुम्हारी नींद...
नहीं बचे यदि ...
यह मतदान हमार...
ढूँढते रह जाओ...
अरमान तिरंगा ...
वैसे ही पेड़ के पीले पत्ते झड़ रहे हैं, बूढे लोगों का सम्मान कीजिए, उनसे प्यार के दो वैसे ही पेड़ के पीले पत्ते झड़ रहे हैं, बूढे लोगों का सम्मान कीजिए, उनसे ...
और वे खुशी से खिलेंगे प्रभु के प्रति आभार जताओ। और वे खुशी से खिलेंगे प्रभु के प्रति आभार जताओ।
मन में एक विचार कौंधा जगा एक विश्वास । मन में एक विचार कौंधा जगा एक विश्वास ।
आते है वापस लोग गुजरे हुए ? हम भी करते रहे कोई भी आते नहीं थे। आते है वापस लोग गुजरे हुए ? हम भी करते रहे कोई भी आते नहीं थे।
उम्मीदों को पलकों पे बसाये सुर्ख लाली से आसमां फिर रंग जाएगा..... उम्मीदों को पलकों पे बसाये सुर्ख लाली से आसमां फिर रंग जाएगा.....
जीवन जितना सरल रहेगा तप भी उतना कम होगा ! जीवन जितना सरल रहेगा तप भी उतना कम होगा !
जिन्होंने जिंदगी में विशेष कारनामों को दिया अंजाम जिन्होंने जिंदगी में विशेष कारनामों को दिया अंजाम
कर्ण दान से अमर हुआ भले हो शरीर का अंत।। कर्ण दान से अमर हुआ भले हो शरीर का अंत।।
राजनीति का इस देश की, जाने सभी सत्य यथार्थ।। राजनीति का इस देश की, जाने सभी सत्य यथार्थ।।
जो भी इस साँचे मे बैठी हैं या बैठ रही हैं,उन सभी को आदर सहित --- जो भी इस साँचे मे बैठी हैं या बैठ रही हैं,उन सभी को आदर सहित ---
वास है परम धाम, झांकी अति अभिराम, वास है परम धाम, झांकी अति अभिराम,
मगर तुम्हें ज़रूरत न पड़ेगी, इतना यकीन खुद को दिलाता हूँ, मगर तुम्हें ज़रूरत न पड़ेगी, इतना यकीन खुद को दिलाता हूँ,
बिना जुझे हवा के थपेड़ों से कैसे मिलेगी वो ऊंचाइयाँ। बिना जुझे हवा के थपेड़ों से कैसे मिलेगी वो ऊंचाइयाँ।
काला-काला जब हो जाता मुझको बहुत भाता बादल काला-काला जब हो जाता मुझको बहुत भाता बादल
पछताये वो माथा पकड़कर महबूब पर क्यों मर रहे थे । पछताये वो माथा पकड़कर महबूब पर क्यों मर रहे थे ।
हर जगह पर शांति होती है, बच्चे नाव चलाते हैं। आया मौसम बारिश का। हर जगह पर शांति होती है, बच्चे नाव चलाते हैं। आया मौसम बारिश का।
दबा चोंच में दाना लाती नन्हें चूजों की भूख मिटाती। दबा चोंच में दाना लाती नन्हें चूजों की भूख मिटाती।
पेड़ –पौधे भी मुरझाने लगे चिड़ियों ने चहचहाना छोड़ कहीं और दुबक गए पेड़ –पौधे भी मुरझाने लगे चिड़ियों ने चहचहाना छोड़ कहीं और दुबक गए
हाँ, रंग में ढलना जिसका खेल, जल में निर्मलता का मेल। हाँ, रंग में ढलना जिसका खेल, जल में निर्मलता का मेल।
प्यार स्वयं इक जादू है, जो जग को नाच नचाता है। प्यार स्वयं इक जादू है, जो जग को नाच नचाता है।