Sandeep Saras
Inspirational
पानी का स्तर घटा, जनता है बेहाल।
समाधान कैसे करें, सबसे बड़ा सवाल।
सबसे बड़ा सवाल, भूख से प्यास बड़ी है।
पर्यावरण विनाश, समस्या हुई खड़ी है।
पानी की चहुँ ओर, मचेगी खींचा-तानी।
नहीं बचे यदि पेड़, मिलेगा कैसे पानी।।
भगवान बेचता ह...
खेल जिंदगी है
पाठशाला में र...
तू मुझे सम्भा...
तुम्हारी नींद...
नहीं बचे यदि ...
यह मतदान हमार...
ढूँढते रह जाओ...
अरमान तिरंगा ...
कुछ गमलों मे मैने बीज बोये दस रोज के बाद उसमे कुछ नन्हे हरे पत्ते निकल आये। कुछ गमलों मे मैने बीज बोये दस रोज के बाद उसमे कुछ नन्हे हरे पत्ते निकल आये।
जन्मदिन मानते हैं शुभ ये अच्छी लगती है बात। जन्मदिन मानते हैं शुभ ये अच्छी लगती है बात।
प्रकृति की गोद में वो बड़ा सुहाना बचपन था, उम्र से पहले बड़े होते बचपन से वो अलग था। प्रकृति की गोद में वो बड़ा सुहाना बचपन था, उम्र से पहले बड़े होते बचपन से वो अल...
मुस्कुराओ खिलखिलाओ यही जिंदगी की सच्ची निशानी है। मुस्कुराओ खिलखिलाओ यही जिंदगी की सच्ची निशानी है।
और खो देते अपना, आत्मविश्वास जीवन के, अंतिम श्वास तक... और खो देते अपना, आत्मविश्वास जीवन के, अंतिम श्वास तक...
बड़ा पुण्य का कार्य है तनिक संकोच मत करना। जीवन के बाद भी जीवन हो ऐसा अपना मरना। बड़ा पुण्य का कार्य है तनिक संकोच मत करना। जीवन के बाद भी जीवन हो ऐसा अपना मरन...
जीवन के बाद जीवन ही है नवजीवन। जीवन के बाद जीवन ही है नवजीवन।
न किसी को भाग्य से ज्यादा न कम मिलता, जितना लिखा उतना ही तो वो पाएगा। न किसी को भाग्य से ज्यादा न कम मिलता, जितना लिखा उतना ही तो वो पाएगा।
इसलिए जो करना है अभी कर लो, जीवन के बाद तो जो किया है वो भोगना होगा। इसलिए जो करना है अभी कर लो, जीवन के बाद तो जो किया है वो भोगना होगा।
कल्पना का अंश विश्लेषण में भी कल्पना का अंश समालोचन में भी। कल्पना का अंश विश्लेषण में भी कल्पना का अंश समालोचन में भी।
विद्या विनय विवेक में, बसते हैं सब मान। ऐसा व्यक्ति प्रकाश हैं, देते सबको ज्ञान।। विद्या विनय विवेक में, बसते हैं सब मान। ऐसा व्यक्ति प्रकाश हैं, देते सबको ज्ञ...
खेलते कूदते जो बड़े हो जाते तन मन को वो स्वस्थ बनाते। खेलते कूदते जो बड़े हो जाते तन मन को वो स्वस्थ बनाते।
हार गया इसके सामने तो बन न पाएगा शूरवीर। हार गया इसके सामने तो बन न पाएगा शूरवीर।
अगर जहां की परियों ने, अपने अस्तित्व की अहमियत को निहारा। अगर जहां की परियों ने, अपने अस्तित्व की अहमियत को निहारा।
बाँसुरी मधुर तो बजा के गया राधिका का चैन चुरा के गया।। बाँसुरी मधुर तो बजा के गया राधिका का चैन चुरा के गया।।
सत्तावन की तलवार लिखूँ। शोणित की बहती धार लिखूँ। सत्तावन की तलवार लिखूँ। शोणित की बहती धार लिखूँ।
हो हिंदी का प्रसार जगत में अब तो है कर्त्व्य हमारा। हो हिंदी का प्रसार जगत में अब तो है कर्त्व्य हमारा।
तोहफा दिया जिसने करवटों का सिलसिला चैन व नींद रूठ जाए, उसका दिन-रात से। तोहफा दिया जिसने करवटों का सिलसिला चैन व नींद रूठ जाए, उसका दिन-रात से।
दुनिया से कर प्यार को, सभी रखेंगें मेल।। दुनिया से कर प्यार को, सभी रखेंगें मेल।।
तेरी मिट्टी कि खुशबु पे निसार मेरा जीवन फिर क्या लिखूँ मैं। तेरी मिट्टी कि खुशबु पे निसार मेरा जीवन फिर क्या लिखूँ मैं।