Sandeep Saras
Romance
तुम्हारी नींद उड़ जाए तुम्हारा चैन खो जाए।
तुम्हारा दर्द भी छलके, हमारा काम हो जाए।
हमारी वेदना ऐसे तुम्हारे द्वार पे मचले,
तुम्हारे हाथ की मेंहदी, हमारा अश्रु धो जाए।
भगवान बेचता ह...
खेल जिंदगी है
पाठशाला में र...
तू मुझे सम्भा...
तुम्हारी नींद...
नहीं बचे यदि ...
यह मतदान हमार...
ढूँढते रह जाओ...
अरमान तिरंगा ...
स्वर्ग लोक की थी वो क्रांति, या थी मन की स्वप्नरूपी भ्रांति। स्वर्ग लोक की थी वो क्रांति, या थी मन की स्वप्नरूपी भ्रांति।
साथ मेरे चलते चलते डर के मुझसे लिपट जाना। साथ मेरे चलते चलते डर के मुझसे लिपट जाना।
ले आए तुम प्रेम प्रस्ताव, क्या इसमें है बाँधने का स्वभाव? ले आए तुम प्रेम प्रस्ताव, क्या इसमें है बाँधने का स्वभाव?
बारिश की वह हल्की सी टप टप ध्वनि, मानो कानों में सितार बजाती है बारिश की वह हल्की सी टप टप ध्वनि, मानो कानों में सितार बजाती है
तू साथ हो तो त्यौहार भी जैसे सांस लेने लगे, तेरी आहट से इस रात को फिर से संवार लानी है तू साथ हो तो त्यौहार भी जैसे सांस लेने लगे, तेरी आहट से इस रात को फिर से संवा...
मौन होकर भी, बहुत कुछ लिखती कलम है। मौन होकर भी, बहुत कुछ लिखती कलम है।
वो राहें अब लगती हैं अजनबी की तरह। वो राहें अब लगती हैं अजनबी की तरह।
तू ही है जो हर दर्द को, अपनी गोद में भर लेती है, तू ही है जो हर दर्द को, अपनी गोद में भर लेती है,
कभी लौट आ, फिर से वो सफर हम शुरू करेंगे। कभी लौट आ, फिर से वो सफर हम शुरू करेंगे।
अजीब कशमकश में कस देता है, कस कस कर दिल को, चकनाचूर कर देता है, अजीब कशमकश में कस देता है, कस कस कर दिल को, चकनाचूर कर देता है,
मिलने की कोई युक्ति परमेश्वर से मांग बैठा हूं। मिलने की कोई युक्ति परमेश्वर से मांग बैठा हूं।
मेरे पास शब्द थे, पर साहस नहीं, और उसके पास ख़ामोशी थी, मेरे पास शब्द थे, पर साहस नहीं, और उसके पास ख़ामोशी थी,
दूर क्यों इतने हुए कुछ पास आकर देखते तो। तुम मुझे अपना बना कर मुस्कुरा कर देखते तो। दूर क्यों इतने हुए कुछ पास आकर देखते तो। तुम मुझे अपना बना कर मुस्कुरा कर दे...
क्या कोई मेरी इस पीड़ा को पहचानेगा कितनी बार प्रभु से विनती करती , क्या कोई मेरी इस पीड़ा को पहचानेगा कितनी बार प्रभु से विनती करती ,
हृदय की मृदु कोमल भावनाओं में, कदाचित कोई विराम संभव नहीं। हृदय की मृदु कोमल भावनाओं में, कदाचित कोई विराम संभव नहीं।
मेरी चाहत को तुम समझो मेरी चाहत को तुम समझो
हरा हरा भइल धरती कै ई अंचरवां हरे रंग के प्रकृति पहन लै गहनवां ! हरा हरा भइल धरती कै ई अंचरवां हरे रंग के प्रकृति पहन लै गहनवां !
मेरे दिलनशीं तो मुझसे कब के रूठे हुए हैं जाते जाते थोड़ा सा उनको मैं मनाता मेरे दिलनशीं तो मुझसे कब के रूठे हुए हैं जाते जाते थोड़ा सा उनको मैं मनाता
आशिक़ हूँ प माशूक़-फ़रेबी है मेरा काम मजनूँ को बुरा कहती है लैला मेरे आगे। आशिक़ हूँ प माशूक़-फ़रेबी है मेरा काम मजनूँ को बुरा कहती है लैला मेरे आगे।
फोन उसका छीन कर भागा वह अंधेरी रात में। फोन उसका छीन कर भागा वह अंधेरी रात में।