STORYMIRROR

Alpa Mehta

Tragedy

4  

Alpa Mehta

Tragedy

एक व्यथा

एक व्यथा

1 min
367

होती है दिल मे कश्मकश...
जब दिल किसी पे आता है..
निगाहेँ तो साथ देती है..
पर जुबाँ मात दे जाती है..
आते है वो जब रूबरू..
होँश उड़ जाते है..
ये दिल भी साला.. अपना होके भी..
पराया हों जाता है..
साँसे तो लेता है...
पर.. धड़कना भूल जाता है..
alp@meht@#ek ehesas..



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy