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Pinki Khandelwal

Inspirational

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Pinki Khandelwal

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एक सवाल खुद से....आखिर क्यों?

एक सवाल खुद से....आखिर क्यों?

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जब कभी मां को देखती तो सोचती खूब झगड़ू उनसे,

हर बार हमारी खुशियों की,

हमारे सपनों की करती परवाह,

क्या सिर्फ एक दिन एक मिनट एक सैकंड भी खुद के लिए,

खुद के साथ बिताया होगा उन्होंने?,


हमेशा जब कभी कुछ खरीदने की बोलती,

तो क्यों कह देती हर बार वो.. जरूरत नहीं मुझे,

क्यों खुद के लिए कुछ खरीदने से कतराती हैं?

क्यों हर बार हमारे लिए सोचती है?

क्यों कभी खुद की इच्छाओं को भीतर दबाए रहती है?

क्यों कभी काम से एक दिन की छुट्टी नहीं मांगती है?


क्यों मां बन वो अपने बारे में भूल जाती है?

कि वो भी है उनकी भी एक पहचान है,

क्यों मां बन मानो हंसना भूल जाती है?

क्यों मां बन वो खुद की जिंदगी जीना भूल जाती है?


इन सवालों का जबाव मुझे मेरे अंदर की ममता ने दिया,

जब मैं मां बनी तब मुझे पता चला,

कि क्यों मां बन एक स्त्री खुद को भूल जाती है?

कि क्यों मां बन एक स्त्री हंसना भूल जाती है?

कि क्यों मां बन एक स्त्री खुद की जिंदगी जीना भूल जाती है?

क्योंकि उसकी जिंदगी ही उसके बच्चे बन जाते हैं,

उनको अच्छी परवरिश देना उनका एकमात्र सपना होता है,

जिसको पूरा करने हेतु वो खुद की पहचान भुला,

अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने में खुद को भुला देती है।



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