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RAJESH DHAKA

Drama Fantasy Inspirational

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RAJESH DHAKA

Drama Fantasy Inspirational

एक सफ़र

एक सफ़र

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एक सफ़र समाप्त,
तो दूसरा शुरू हो जाता है।

मिल गई मंज़िल
या सफ़र से ही पेट भर लिया—
ये हिसाब-किताब
पन्नों में बड़ा रह जाता है।

क्योंकि मुसाफ़िरों का
कोई हिसाब नहीं होता।

ऐसा नहीं कि मुसाफ़िरों की
मंज़िल नहीं होती,
पर तलब सफ़र की रहती है।

मुसाफ़िर हैं हम सब
इस जीवन में,
पर दिल मंज़िल से लगा लेते हैं।

न मिले मंज़िल
तो रास्तों को ग़लत ठहरा देते हैं।

मुसाफ़िर होते हैं वो लोग
जो भटके को रास्ता दिखा देते हैं।

क्या आप मुसाफ़िर हैं?

मैं तो हूँ...


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