दो चेहरे
दो चेहरे
हर आदमी में होते हैं दो चेहरे,
एक दिखाता है,
एक छुपाता है।
एक चेहरा है
जो दिखाना है,
एक चेहरा है
जो छुपाना है।
एक रास्ता है
जिस पर चलना है,
एक रास्ता है
जिसका पता लगाना है।
एक अच्छाई
जो मेरे अंदर है,
एक बुराई
जिसको दफ़नाना है।
एक सच है
जो होना है,
एक झूठ है
जिसको भुलाना है।
एक मैं हूँ,
एक हम हैं।
एक वो मकान है
जिसमें मैं रहता हूँ,
एक वो घर है
जिसमें परिवार रहता है।
एक पाप है,
एक पुण्य है।
एक राम है
जो सीता माता को चाहता है,
एक रावण है
जिसे सीता को उठाना है।
एक कलियुग है,
एक सतयुग है।
हर आदमी में होते हैं दो आदमी,
एक दिखाता है,
एक छुपाता है।
हर बात में होती हैं उसकी दो बातें,
एक बताता है,
एक गटक जाता है।
हर समाज में होते हैं दो समाज,
एक दुनिया में होती हैं दो दुनियाएँ।
एक जिसमें रहना है,
दूसरी…
ख़ैर।
मेरे में थे दो आदमी।
एक जिसको मार के आया हूँ,
एक जिसने मारा है।
